Jagannath Suna Besa 2023
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Sri Jagannath Suna besa Puri
पुरी जगन्नाथ मंदिर, जो ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित है, वहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व पुरी जगन्नाथ मंदिर के भक्तों द्वारा धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है।ଭାବ ଓ ଭକ୍ତିରେ ପୁରି ଉଠୁଛି ବଡ଼ଦାଣ୍ଡ, ନଅ ଦିନର ଲୀଳା ସାରି ବାହୁଡ଼ୁଛନ୍ତି ମହାବାହୁ। ଜୟ ଜଗନ୍ନାଥ🙏🏼 pic.twitter.com/EpT2kFyftq
— Naveen Patnaik (@Naveen_Odisha) June 28, 2023
सुना बेसा एक ऐसी खास प्रक्रिया है जो इस रथ यात्रा के दौरान देखी जा सकती है। सामान्यतः जब रथ यात्रा की तारीख आती है, तब पहले ही रथ को मंदिर के आस-पास लाए जाते हैं और उसे तैयार किया जाता है। इस तैयारी के दौरान ही सुना बेसा धारण की जाती है।
सुना बेसा का अर्थ होता है "सोने की वेश्या"। इसमें मंदिर के मुख्य मूर्तियों, जैसे जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के आभूषण पहनाए जाते हैं। यह वेश्या को सोने की अनंत संभावनाएं देती है और इसे राजसी मूर्ति बनाती है।
सुना बेसा के दौरान, रथ यात्रा की शुरुआत होने से पहले, मंदिर के पुजारी मूर्तियों को सोने के आभूषण पहनाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान भक्त भी इन मूर्तियों को सोने के आभूषण दान कर सकते हैं। यह एक धार्मिक और आनंदमय अनुभव होता है और लोग इसमें भाग लेने के लिए बड़ी उत्सुकता से आते हैं।
सुना बेसा एक धार्मिक समारोह है जो पुरी जगन्नाथ मंदिर के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसका आयोजन पुरी जगन्नाथ मंदिर के आस-पास होता है और इसमें भक्तों का भव्य आगमन होता है। सुना बेसा के दौरान मंदिर का वातावरण आनंदमय होता है और भक्तों को अपार धार्मिक आनंद मिलता है।
सुना बेसा के दौरान, रथ यात्रा की शुरुआत होने से पहले, मंदिर के पुजारी मूर्तियों को सोने के आभूषण पहनाते हैं। इन मूर्तियों को सोने के आभूषणों से सजाने के बाद, वे वेश्या के रूप में अपना प्रतीत होते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर में धार्मिक गाने-भजनों की ध्वनि गूंजती है और भक्तजन इस दिव्य दर्शन का आनंद लेते हैं।
यह समारोह आमतौर पर अष्टचाप, एक विशेष प्रकार के अभिनय या नृत्य के साथ प्रारंभ होता है। वेश्या की भूमिका में एक पुरुष कलाकार होता है, जिसे वेश्या का संदेश देने के लिए चुना जाता है। वह अपने विशेष रंगीन वेश में उभरता है और आगे बढ़कर भक्तों के बीच नृत्य करता है।
सुना बेसा के दौरान लोग रथ यात्रा के पश्चात मंदिर की सुन्दर दरवाज़ा आराधना करने जाते हैं। मंदिर की विभिन्न मूर्तियों के दर्शन के बाद, वे आपस में प्रसाद बाँटते हैं और अपने प्रिय भगवान की कृपा का आभास करते हैं।
सुनाबेस क्या हे ?
जगन्नाथ सुनाबेसा में भगवान जगन्नाथ को सोने के वस्त्रों में बदला जाता है, जो उनके अंदर विराजमान अद्वितीय सौंदर्य को प्रकट करते हैं। यह पर्व आठ दिनों तक चलता है और इस दौरान लाखों भक्त जगन्नाथ मंदिर में इस अद्वितीय दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।
जगन्नाथ सुनाबेसा का महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक महत्व होता है। इस पर्व के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के सामीप आते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं। यह पर्व भक्ति, श्रद्धा और सम्प्रीति की भावना को जगाने का एक अवसर होता है और लोग इसे बहुत धूमधाम से मनाते हैं।
जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व के दौरान पुरी नगर में अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। लोग परंपरागत गीत गाते हैं, नृत्य करते हैं और भजन की धुन में रस भरते हैं। मंदिर में भक्तों को खाना-भोजन भी प्रदान किया जाता है और यहां एक मेला भी लगाया जाता है जिसमें लोग विभिन्न वस्त्र, आभूषण, खिलौने आदि की खरीदारी करते हैं।
जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व को मनाने से पूरे समुदाय को एकता, समरसता और शांति की भावना मिलती है। यह पर्व सभी वर्गों और जातियों के लोगों के लिए समान रूप से अवसर प्रदान करता है, जहां सभी मिल-जुलकर भगवान की कृपा और आशीर्वाद को महसूस कर सकते हैं।
इस प्रकार, जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व में भगवान जगन्नाथ की सुनाबेस में विशेष अर्चना की जाती है, जिससे उनके भक्तों को प्रभु के दर्शन का आनंद मिलता है और एकता, भक्ति और प्रेम की भावना को समर्पित किया जाता है।
जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व का अर्थ है "सोने के वस्त्र में भगवान जगन्नाथ का दर्शन"। इस पर्व के दौरान भक्तों को आदर्श जीवन की मिसाल देने के लिए भगवान जगन्नाथ और उनके सहयोगी देवताओं की मूर्तियों को खास वस्त्रों में अलंकृत किया जाता है। यह आचार भक्तों को यह सिखाता है कि हमेशा अपने आप को सजाकर, अच्छे कर्मों में लगाकर और समस्त मानवता के प्रति जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व का अर्थ है "सोने के वस्त्र में भगवान जगन्नाथ का दर्शन"। इस पर्व के दौरान भक्तों को आदर्श जीवन की मिसाल देने के लिए भगवान जगन्नाथ और उनके सहयोगी देवताओं की मूर्तियों को खास वस्त्रों में अलंकृत किया जाता है।
कबसे होती हे सुनाबेस (जगन्नाथ परंपरा) ?
सुनाबेस, जो जगन्नाथ परंपरा का हिस्सा है, हर वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा के बाद मनाया जाता है। यह रथ यात्रा ओडिशा राज्य के पुरी नगर में अष्टमी तिथि को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में होती है। इसके बाद आठवें दिन, जो दशमी तिथि होती है, जगन्नाथ सुनाबेसा का आयोजन किया जाता है। इस पर्व के दौरान भगवान जगन्नाथ के वस्त्रों को बदलकर सोने के वस्त्रों में अलंकृत किया जाता है। इस पर्व को भक्तों के साथ मनाने के लिए लाखों लोग जमा होते हैं और भगवान की आराधना करते हैं।
जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व आठ दिनों तक चलता है और इस दौरान जगन्नाथ मंदिर में भक्तों को सुनाबेस में अलंकृत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों का दर्शन करने का अवसर मिलता है। यह विशेष पर्व भक्तों को अपार आनंद और आदर्शों के साथ भगवान के समीप ले जाता है।
जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व के दौरान, लोग मंदिर में ध्यान, भजन-कीर्तन, पूजा और व्रत-त्याग करते हैं। यह पर्व भक्ति और साधना की उच्चतम भावना को प्रकट करने का अवसर होता है। भक्तों को इस पर्व के दौरान श्रद्धा और निष्ठा के साथ भगवान की पूजा-अर्चना करने का अवसर मिलता है और उन्हें भगवान के आशीर्वाद का अनुभव होता है।
जगन्नाथ सुनाबेसा पर्व भक्तों के बीच अपार आत्मीयता, समरसता और अखंडता का विकसित करता है। यह पर्व भक्तों को भगवान के साथ एक मेंले की भावना देता है, जहां सभी लोग एक साथ आत्मीयता के साथ पवित्र भक्ति का आनंद लेते हैं।
सुनाबेस में कितना सुना भगवान पे लागती हे
सुनाबेस में भगवान जगन्नाथ को सोने के वस्त्रों में अलंकृत किया जाता है। यह सोने की वस्त्रें भक्तों द्वारा दान की जाती हैं और इसकी लागत भक्तों के सहयोग और दान के आधार पर निर्धारित की जाती है। इसकी लागत वर्षों के आधार पर बदलती रहती है और सामाजिक योगदान के माध्यम से यह धार्मिक आयोजन संचालित किया जाता है। यद्यपि इसकी विशेष लागत विशेषाधिकारियों द्वारा निर्धारित की जाती है, लेकिन आमतौर पर यह एक बड़ी और महत्वपूर्ण आर्थिक प्रयास की मानी जाती है जो भक्तों के सहयोग पर निर्भर करती है।
सुनाबेस में भगवान जगन्नाथ को सोने के वस्त्रों में अलंकृत करने की लागत आमतौर पर बहुत महंगी होती है। इसके पीछे उच्चतम स्तर की शिल्पकला, सोने की मात्रा और करीबी समय की महत्वपूर्णता का प्रभाव होता है। इसलिए, सुनाबेस को आयोजित करने के लिए विशेष धनराशि आवश्यक होती है जो सामरिक और कलात्मक कार्यों को संचालित करने के लिए उपयोग होती है।
सुनाबेस की लागत का महत्वपूर्ण हिस्सा भक्तों द्वारा दान या योगदान द्वारा जुटायी जाती है। यह एक सामुदायिक यात्रा होती है जहां लोग सहयोग करते हैं और अपनी साझेदारी के माध्यम से धर्मिक कार्यक्रमों की संचालन में योगदान देते हैं। इसके लिए, भक्तों को धर्मिक और आर्थिक योगदान करके इस पवित्र आयोजन का समर्थन करना पड़ता है।
इस रूप में, सुनाबेस न केवल धार्मिक अवसर है, बल्कि यह भक्तों को सेवा, समरसता और सामुदायिक भावना को व्यक्त करने का अवसर भी प्रदान करता है। इसके माध्यम से भक्तो भगवान को सोना दान करतेहे।
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— Uttam Bhola (@BholaUttam) June 28, 2023

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